Introduction
Cognizable vs Non-Cognizable Offence: Simple Explanation with Examples under BNS 2023 & BNSS
आपराधिक कानून (Criminal Law) को समझते समय सबसे पहला और बुनियादी सवाल यह उठता है कि कोई अपराध कितना गंभीर है और उसमें पुलिस की क्या शक्तियां होती हैं?
चाहे आप Judiciary Exams, AIBE, CLAT PG, या LLB Semester Exams की तैयारी कर रहे हों, Cognizable Offence (संज्ञेय अपराध) और Non-Cognizable Offence (असंज्ञेय अपराध) के बीच का अंतर जानना बेहद जरूरी है।
नए आपराधिक कानूनों—Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 और Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS), 2023—के तहत इन अपराधों की परिभाषा और प्रक्रिया में क्या नियम हैं, आइए इसे आसान और सरल हिंदी में समझते हैं।
1. Cognizable Offence क्या होता है? (संज्ञेय अपराध)
Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS), 2023 के Section 2(1)(g) [पुराना CrPC Section 2(c)] के तहत Cognizable Offence को परिभाषित किया गया है।
सरल शब्दों में, Cognizable Offence वह गंभीर अपराध है जिसमें पुलिस अधिकारी को किसी व्यक्ति को बिना वारंट (Without Warrant) गिरफ्तार करने का कानूनी अधिकार होता है। ऐसे मामलों में पुलिस को जांच (Investigation) शुरू करने के लिए कोर्ट या मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होती।
Key Features of Cognizable Offence:
- Nature: यह गंभीर और समाज के विरुद्ध किए गए अपराध होते हैं (Serious & Heinous Crimes)।
- Arrest Power: पुलिस बिना Court Warrant के अभियुक्त को गिरफ्तार कर सकती है।
- FIR Registration: ऐसे मामलों में पुलिस Section 173 BNSS (पुराना Section 154 CrPC) के तहत FIR दर्ज करने के लिए बाध्य है।
- Investigation: पुलिस बिना Magistrate के Order के तुरंत जांच शुरू कर सकती है।
Example: यदि राम श्याम की हत्या (Murder – Section 103 BNS) कर देता है या उसके घर में डकैती (Dacoity – Section 310 BNS) डालता है, तो यह एक Cognizable Offence है। पुलिस को राम को गिरफ्तार करने के लिए कोर्ट से वारंट लेने की जरूरत नहीं है; पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचकर राम को गिरफ्तार कर सकती है और जांच शुरू कर सकती है।
2. Non-Cognizable Offence क्या होता है? (असंज्ञेय अपराध)
BNSS, 2023 के Section 2(1)(o) [पुराना CrPC Section 2(l)] के तहत Non-Cognizable Offence को परिभाषित किया गया है।
Non-Cognizable Offence कम गंभीर प्रकृति के अपराध होते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस बिना कोर्ट के वारंट के किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकती और न ही सीधे FIR दर्ज करके जांच शुरू कर सकती है।
Key Features of Non-Cognizable Offence:
- Nature: यह कम गंभीर और मुख्य रूप से व्यक्तिगत विवाद से जुड़े अपराध होते हैं (Less Serious Crimes)।
- Arrest Power: पुलिस बिना Warrant के गिरफ्तार नहीं कर सकती।
- NCR Registration: पुलिस इसमें FIR दर्ज नहीं करती, बल्कि Section 175 BNSS (पुराना Section 155 CrPC) के तहत Non-Cognizable Report (NCR) दर्ज करती है और शिकायतकर्ता को मजिस्ट्रेट के पास जाने की सलाह देती है।
- Investigation: मजिस्ट्रेट के स्पष्ट आदेश (Order of Magistrate) के बिना पुलिस जांच शुरू नहीं कर सकती।
Example: यदि दो पड़ोसियों के बीच मामूली कहासुनी होती है और एक व्यक्ति दूसरे को साधारण मानहानि (Defamation – Section 356 BNS) की धमकी देता है या मामूली धक्का-मुक्की (Simple Hurt – Section 115 BNS) करता है, तो यह Non-Cognizable Offence है। पुलिस सीधे आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकती; शिकायतकर्ता को मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज करानी होगी।
3. Cognizable vs Non-Cognizable: Detailed Comparison Table
Parameter / Points | Cognizable Offence (संज्ञेय) | Non-Cognizable Offence (असंज्ञेय) |
BNSS Definition | Section 2(1)(g) BNSS | Section 2(1)(o) BNSS |
Gravity / Severity | Serious & Heinous (गंभीर) | Less Serious / Petty (कम गंभीर) |
Arrest without Warrant | Yes, Police can arrest without warrant. | No, Police cannot arrest without warrant. |
Police Investigation | Starts immediately without Magistrate order. | Cannot start without Order of Magistrate. |
Report Type | FIR under Section 173 BNSS | NCR under Section 175 BNSS |
Bail Status | Generally Non-Bailable (with exceptions) | Generally Bailable |
BNS Examples | Murder (S. 103), Rape (S. 64), Kidnapping (S. 137), Theft (S. 303) | Simple Hurt (S. 115), Defamation (S. 356), Forgery (S. 336) |
4. Key Legal Provisions under BNS & BNSS Every Law Student Should Know
(A) First Schedule of BNSS (अपराधों का वर्गीकरण)
कोई अपराध Cognizable है या Non-Cognizable, यह खुद कानून बनाने वाली विधायिका तय करती है। BNSS की First Schedule में सभी BNS अपराधों की सूची दी गई है, जहां यह स्पष्ट लिखा होता है कि कौन सा अपराध:
- Cognizable है या Non-Cognizable
- Bailable है या Non-Bailable
- किस Court द्वारा Trial किया जाएगा (Court of Session or Magistrate)
(B) Bailable vs Non-Bailable Connection
सामान्य नियम यह है कि अधिकांश Cognizable Offences गैर-जमानती (Non-Bailable) होते हैं और Non-Cognizable Offences जमानती (Bailable) होते हैं।
हालांकि, यह नियम शत-प्रतिशत लागू नहीं होता!
- Exception: BNS के तहत Theft (Section 303) एक Cognizable Offence है, लेकिन यह Bailable है।
(C) Effect of Mixed Offences (अगर एक साथ कई अपराध हों)
यदि किसी मामले में एक से अधिक अपराध किए गए हों, जिनमें से कुछ Non-Cognizable हों और कम से कम एक अपराध Cognizable हो, तो पूरा मामला क्या माना जाएगा?
BNSS Section 175(4) [पुराना CrPC Section 155(4)] के अनुसार:
यदि किसी केस में दो या दो से अधिक अपराध शामिल हैं, जिनमें से कम से कम एक अपराध Cognizable है, तो उस पूरे मामले को Cognizable Case ही माना जाएगा, और पुलिस को उसमें बिना वारंट जांच और गिरफ्तारी का अधिकार मिल जाएगा।
Example: यदि किसी व्यक्ति के साथ मारपीट की जाती है (Non-Cognizable) और साथ ही उसकी सोने की चैन भी छीन ली जाती है (Snatching – Section 304 BNS, जो कि Cognizable है), तो पुलिस पूरे केस को Cognizable मानकर जांच और कार्यवाही करेगी।
5. Law Students के लिए Exam Writing Strategy
जब परीक्षा में Cognizable और Non-Cognizable Offence पर प्रश्न पूछा जाए, तो उत्तर लिखते समय निम्नलिखित ढांचा (Structure) अपनाएं:
- Definitions: BNSS के Section 2(1)(g) और Section 2(1)(o) का संदर्भ देते हुए सटीक परिभाषा लिखें।
- Police Powers: Arrest and Investigation के मामले में पुलिस की शक्तियों का अंतर स्पष्ट करें।
- Statutory Provisions: FIR (Section 173) और NCR (Section 175) की धाराओं का उल्लेख करें।
- Relevant BNS Examples: उत्तर में BNS 2023 के नए धारा नंबरों (जैसे Section 103 for Murder) के साथ उदाहरण दें।
- Special Rule: Section 175(4) BNSS के Mixed Offences वाले नियम का उल्लेख करके उत्तर समाप्त करें।
Conclusion
Cognizable और Non-Cognizable अपराधों के बीच का अंतर केवल किताबी परिभाषा नहीं है, बल्कि यह नागरिक स्वतंत्रता (Personal Liberty) और राज्य की पुलिस शक्तियों (State Power) के बीच का संतुलन है। गंभीर अपराधों में समाज की सुरक्षा के लिए पुलिस को त्वरित कार्रवाई की शक्ति दी गई है, जबकि कम गंभीर अपराधों में नागरिकों को बेवजह की पुलिस गिरफ्तारी से बचाने के लिए न्यायिक नियंत्रण (Magistrate Control) रखा गया है।


