Introduction
Evidence Law में Dying Declaration एक बहुत ही महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है।
Judiciary, LLB, LLM और competitive exams में यह topic बार–बार पूछा जाता है।
अक्सर students के मन में ये सवाल होते हैं:
- क्या dying declaration सिर्फ murder cases में ही होती है?
- क्या dying declaration लिखित ही होनी चाहिए?
- क्या dying declaration के लिए डॉक्टर की मौजूदगी ज़रूरी है?
- क्या dying declaration अकेले conviction का आधार बन सकती है?
इन सभी सवालों का जवाब Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 (BSA 2023) के Section 26 में मिलता है।
Section 26 – BSA 2023 (Overview)
Section 26 उन मामलों से जुड़ा है जहाँ
ऐसे व्यक्ति का statement relevant माना जाता है जो:
- मर चुका है, या
- जिसे पाया नहीं जा सकता, या
- जो evidence देने में असमर्थ है
इन statements को सामान्य रूप से “Statements by persons who cannot be called as witnesses” कहा जाता है।

Dying Declaration का सीधा मतलब है:
मरने वाले व्यक्ति द्वारा अपनी मृत्यु के कारण या उससे जुड़ी परिस्थितियों के बारे में दिया गया बयान।
सरल शब्दों में:
जब कोई व्यक्ति मरने से पहले यह बता दे कि उसकी मौत कैसे, किस वजह से और किन परिस्थितियों में हुई, तो वही उसका Dying Declaration कहलाता है।
Section 26(a) – Dying Declaration (मुख्य प्रावधान)
कानून क्या कहता है?
यदि कोई व्यक्ति:
- अपनी मृत्यु के कारण के बारे में, या
- उस transaction / घटना के बारे में बयान देता है
जिसके कारण उसकी मृत्यु हुई,
तो ऐसा statement relevant fact माना जाएगा।
चाहे उस व्यक्ति को मृत्यु की आशंका थी या नहीं,
चाहे मामला civil हो या criminal,
statement फिर भी relevant होगा।
Important Point (Exam Favourite)
Dying Declaration के लिए यह ज़रूरी नहीं है कि व्यक्ति को मौत की उम्मीद हो।
यह Indian law का बड़ा difference है (English law से अलग)।
Simple Example (Dying Declaration)
मान लीजिए:
A को गंभीर चोट लगी है।
मरने से पहले A कहता है:
“B ने मुझे चाकू मारा था।”
✔ A का यह statement
✔ उसकी मृत्यु के कारण से जुड़ा है
✔ इसलिए यह Dying Declaration है
✔ और Section 26(a) के तहत relevant है
Illustrations
Illustration (a) – Murder / Rape Case
यदि A मरने से पहले यह कहे कि:
- उसकी हत्या B ने की
- या उसके साथ बलात्कार हुआ
तो A का यह statement:
✔ उसकी मृत्यु से जुड़ा है
✔ इसलिए relevant fact है
Illustration (b) & (c) – Diary Entries
Illustration (b) & (c) – Diary Entries
यदि कोई व्यक्ति:
- अपनी diary में
- या business diary में
कोई entry करता है और बाद में मर जाता है,
तो:
✔ वह entry भी relevant हो सकती है
✔ यदि वह issue से जुड़ी हो
Illustration (d) – Ship Wreck
यदि कोई जहाज डूब गया और किसी मृत व्यक्ति ने पहले पत्र लिखा था कि:
“आज जहाज मुंबई से रवाना हुआ”
✔ यह statement ship wreck से जुड़ा है
✔ इसलिए relevant माना जाएगा
Illustration (f) – Marriage
यदि किसी मृत व्यक्ति ने कहा कि:
“मैंने A और B की शादी कराई थी”
✔ यह statement marriage से जुड़ा है
✔ और relevant fact है
Illustration (h) – Ship Protest (Wreck)
जहाज के कप्तान का protest:
✔ यदि वह मर चुका हो
✔ और उसका statement दुर्घटना से जुड़ा हो
✔ तो relevant माना जाएगा
Dying Declaration लिखित ही होना ज़रूरी है?
❌ नहीं।
Dying Declaration:
- लिखित भी हो सकती है
- मौखिक (oral) भी हो सकती है
- इशारों (gestures) से भी हो सकती है
बस इतना ज़रूरी है कि
statement मृत्यु के कारण या परिस्थितियों से जुड़ा हो।
क्या डॉक्टर या मजिस्ट्रेट ज़रूरी है?
कानून में अनिवार्य नहीं है,
लेकिन practical रूप से:
- डॉक्टर की certification
- मजिस्ट्रेट की मौजूदगी
Dying Declaration की credibility बढ़ा देती है।
क्या Dying Declaration अकेले conviction का आधार बन सकती है?
✔ हाँ, अगर:
- Dying declaration clear हो
- voluntary हो
- बिना दबाव के दी गई हो
- contradictions न हों
तो court इसे अकेले भी conviction का आधार बना सकती है।
Exam One-Line Points
- Dying Declaration = Section 26(a)
- Person must be dead
- Statement relates to cause of death
- Expectation of death जरूरी नहीं
Written / Oral / Gesture – सब valid
Dying Declaration Evidence Law का backbone है।
क्योंकि कई बार:
- Victim ही सबसे important witness होता है
- लेकिन वह court में आ नहीं पाता
इसलिए कानून उसके आख़िरी शब्दों को truth के सबसे करीब मानता है।
अगर concept साफ है,
तो:
- MCQs आसान
- Mains strong
- Viva confident


